गजेटेड वाले बालाजी: यहां आने वालों की पूरी होती है हर मुराद

रमेश शर्मा...
जैसलमेर। कोरोना महामारी के चलते जहां प्रदेश के सभी मंदिरों में लॉकडाउन का पहरा है और भक्तों को मंदिरों के खुलने का बेसब्री से इंतजार है। कोरोना संक्रमण की गति को देखते हुए प्रशासन ने धर्म स्थल प्रमुखों द्वारा देवालय खोले जाने की राय को सरकार के अवलोकनार्थ भेज दिया है। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक धर्मस्थल खोले जाएंगे। जिले में 22 मार्च से मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं।

इस संबंध में पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए धर्म स्थल प्रमुखों से राय मांगी थी, जिसमें जिला कलेक्टर को अधिकार दिए गए थे। इसी तरह जैसलमेर का गजेटेड हनुमान मंदिर तीन महीने से भक्तों बिना सुनसान दिखाई दे रहा है। तीन महीने से भक्तों ने हनुमान जी के दर्शन नहीं किए है। हिन्दुस्तान का यह पहला हनुमान मंदिर है जिसमें बिराजित हनुमान जी महाराज गजेटेड यानि राजपत्रित हैं।

हनुमान भक्तों की गजेटेड हनुमान पर अटूट आस्था है। भक्तों का मानना है कि हनुमानजी हर किसी की मुराद जरूर पूरी करते हैं। चूंकि बिजली विभाग के परिसर में हैं अतः इन हनुमानजी को भक्तगण करंट बालाजी के नाम से भी पुकारते हैं। इन भक्तों की पक्की मान्यता है कि जो भी भक्त हनुमान दादा के दरबार में आ जाता है। हनुमानजी उनकी सारी मनोकामनाएं करंट की मानिंद पूर्ण करते हैं। आमतौर पर रोजगार और प्रमोशन के लिये लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते और कार्यालय के उच्चाधिकारियों की मान मनोव्वल करते है।

कहते हैं कि जैसलमेर के गजेटेड हनुमान जी की शरण में अगर कोई एक बार आ गया तो उसे कहीं भी चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहती। सरकारी नौकरी प्राप्त करने के इच्छुक बेरोजगार हो या फिर सरकारी कार्यालय में प्रमोशन की इच्छा रखने वाले कर्मचारी, अपनी नौकरी और प्रमोशन का पहला आवेदन गजेटेड हनुमान जी के सामने रखते है और बाकायदा ये गजेटेड हनुमान जी इनके आवेदनों का निस्तारण भी करते है, यही कारण है कि यहां पर प्रसाद के साथ साथ नौकरी और प्रमोशन की अर्जियां भी बड़ी संख्या में आती है, जिस तरह सरकारी कार्यालय में गजेटेड अधिकारी कृपा की आवश्यकता नीचे के कर्मचारियों को रहती है ठीक उसी प्रकार इस गजेटेड हनुमान जी की कृपा की आवश्यकता अधिकारियों, कर्मचारियों और बेरोजगारों को रहती है।

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