जयपुर ग्रामीण पुलिस को मिली बड़ी सफलता, साइबर ठगों के एक बड़े नेटवर्क का किया पर्दाफाश...


देवेंद्र शर्मा...

जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्मा के निर्देशन में एक बार फिर से बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इस बार साइबर ठगों की बड़ी गैंग का पर्दाफाश किया गया है। लोगों को ठगने हेतु गैंग ने पूरे देश में अपना नेटवर्क फैला रखा था। इस नेटवर्क को तोड़ने और आरोपियों को पकड़ने के लिये जयपुर ग्रामीण एसपी शर्मा के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया और इस गैंग के 6 सदस्यों को धरदबोचा। इस गैंग में शामिल सभी आरोपित एमबीए और बीटेक के छात्र हैं जो कि लोगों को चूना लगाने का कार्य काफी समय से कर रहे थे। यह सभी फोन—पे, पेटीएम और वॉलेट से लोगों के बैंक खातों को साफ करते आ रहे थे।  

गौरतलब हैकि इस गैंग का नेटवर्क पूरे देश में है, जो फोन-पे, पेटीएम, गूगल-पे जैसे मनी वॉलेट एप से लोगों के खाते साफ करने में माहिर थे। बंद हुई पुराने मोबाइल सिम के नंबरों को खोजकर उनसे लिंक इन वॉलेट एप के जरिए साइबर क्राइम को अंजाम देते थे, पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

कार्रवाई को लेकर जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्मा ने बताया कि पकड़ी गई गैंग का मास्टर माइंड मनोज महापात्र उड़ीसा का रहने वाला है। इसके अलावा इस गैंग में लखीमपुरखीरी, यूपी का निवासी रचित वर्मा, सनीशर्मा, अंकित शर्मा, शाहजहांपुर, यूपी निवासी पवन कुमार और कठूमर, अलवर का रहने वाला अखिल कुमार को टीम ने दबोचा है। पकड़े गये आरोपितों में से मनोज एमबीए किया हुआ है और इंजीनीयरिंग का डिप्लोमा कर रहा है, जबकि अखिल कुमार कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया हुआ है।

पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्मा ने बताया कि इस ऑपरेशन को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र यादव, गोविंदगढ़ डिप्टी एसपी संदीप सारस्वत और साइबर सेल ग्रामीण के एएसआई रतनदीप द्वारा अंजाम दिया गया है।


मिली जानकारी के अनुसार दो महीने पहले सामाेद थाने में राजीव चौधरी नाम के व्यक्ति ने मुकदमा दर्ज करवाया कि उसके खाते से बिना कोई ओटीपी पूछे अलग-अलग ट्रांजेक्शन से 7.19 लाख रुपए निकल गए। इस मामले की जांच के लिए टीम का गठन किया। टीम ने जब जांच कि तो पता चला कि साइबर ठग करने वाले ये लोग सिम बेचने वाले डिस्टीब्यूटर को उपलब्ध करवाए जाने वाले विशेष एप पर वे मोबाइल नंबर सर्च करते हैं, जिनकी सिम बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध है फिर इन नंबरों में से उन नंबरों को ढूंढते हैं, जिन पर पहले कभी फोन-पे, गूगल-पे या पेटीएम के खाते खोले गए हो। ईमेल एड्रेस पर आने वाले ओटीपी नंबर के जरिए ही ये लोग फोन-पे, गूगल-पे या पेटीएम से पैसे अपने वॉलेट पर ट्रांसफर करते और उन्हें उपयोग में लेते थे।

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