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श्रम विभाग द्वारा रोडवेज अधिकारी के विरूद्ध जारी अभियोजन स्वीकृति को राज्य सरकार के स्तर पर निरस्त करवाने के लिए सीएमडी रोडवेज को ज्ञापन

जयपुर। आरएसआरटीसी ऑफिसर्स एसोसिऐशन ने श्रम विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा रोडवेज अधिकारी भानू प्रताप सिंह के विरूद्ध नियमों के विपरीत जारी अभियोजन स्वीकृति को निरस्त करवाने के लिए सीएमडी रोडवेज को ज्ञापन देकर राज्य सरकार के स्तर पर निरस्त करवाने की मांग की। 

ऑफिसर्स एसोसिऐशन के महामंत्री सुधीर भाटी ने बताया कि सीमएडी रोडवेज को दिये ज्ञापन में सयुक्त शासन सचिव द्वारा अभियोजन स्वीकृति औद्यौगिक विवाद अधिनियम-1947 की धारा 29 सपठित धारा 34 के अन्तर्गत जारी की गई है। धारा 34 के अनुसार अभियोजन स्वीकृति उपयुक्त सरकार द्वारा जारी किये जाने का प्रावधान है। तथा राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की स्थापना केन्द्रीय अधिनियम (सड़क परिवहन निगम अधिनियम-1950) के तहत् की गई है इसलिए औद्यौगिक विवाद अधिनियम-1947 की धारा 2ए उपधारा 1 में वर्णित अनुसार राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारी के लिए उपयुक्त सरकार केन्द्र सरकार है।

सीएमडी रोडवेज को मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार के आदेश दिनांक 17.09.2018 के द्वारा औद्योगिक विवाद से सम्बन्धित प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति जारी किये जाने के सम्बन्ध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हुये है। उक्त आदेश के बिन्दु संख्या 6-7 के अनुसार श्रम विभाग द्वारा अभियोजन स्वीकृति का प्रकरण राज्य सरकार को प्रेषित करने उपरान्त सम्बन्धित विभाग द्वारा अभियोजन स्वीकृति का अनुमोदन किये जाने से पूर्व सम्बन्धित अधिकारी जिसके विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जानी है को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किया जाना आवश्यक है।

उक्त प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति हेतु श्रम विभाग द्वारा प्रकरण सम्बन्धित विभाग को प्रेषित किये जाने के पष्चात् ना तो सम्बन्धित अधिकारी को उचित सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया ना ही सम्बन्धित अधिकारी के नियुक्ताधिकारी से किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। श्रम विभाग द्वारा सीधे ही अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी गई, जो कि स्पष्टतया मुख्य सचिव महोदय द्वारा जारी आदेश की अवहेलना है।

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